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10 Comments

  1. Manoj Chand

    Too shameful act ! Respect for each other Varna was missing which is the fine thread of binding our society . This respect has to be restored .

  2. A R Arya

    सदियों से हम लोग कितना अपमान सहते सा रहे हैं। किसी ने भी पीछे झाकने की कोशिश नहीं की। जब तक हम अलग अलग जातियों में बटे रहेगें तब तक ऐसी घटनाएं भविष्य में भी होती रहेंगी क्योंकि ऐसी घटना होने के कुछ दिनों बाद लोग भूल जाते हैं लेकिन कोई भी इसका कारण नहीं ढूढते हैं। इसका मुख्य कारण हमारे समाज का अनेकों जातियों, गुटों टुकड़ों में बटना।जब तक हम सभी एकता में नहीं रहेंगे ऐसी कायरता पूर्ण जातीय घटनाए होती रहेंगी ।हम सभी को अलग अलग जातियों में न बट कर सिर्फ अनुसूचित जाती में रहकर एकता में रहना चाहिए नहीं तो हमारा भी एक दिन नम्बर आ सकता है। क्योंकि उत्तराखंड में वैसे भी हमारी जनसंख्या 20% से 30%के बीच में ही है और हमें किसी अन्य जातियों का moral सपोर्ट भी नहीं है।
    इसलिए यदि हम अलग अलग जातियों में बट कर सिर्फ एक ही जाति जिसे सिर्फ अनुसुजित जाति ही कहे, में संगठित होकर एक साथ रहें तो तभी उन गन्दी मानसिकता वालो का मुकाबला किया जा सकता है।

  3. Avinash Gauniyal

    ओह! हमारे हाथ भी सने हैं खून से और मैं सोचता था कि हाशिमपुरा और भागलपुर जैसी घटनाओं के लिये उत्तराखंड आखिरी स्थान है।

  4. मानवता

    जातिवादी घिनौने-हिंसक हत्याकांड के शिकार सभी मृतकों को भावभीनी श्रद्धांजलि एवं पीड़ित परिवारों के प्रति मार्मिक संवेदनाएं।😢💐💐 सबसे बड़ा धर्म मानवता है और सबसे बड़ी जाति मानवीयता।👍💐💐

  5. RS Manral

    जातिवादी घिनौने-हिंसक हत्याकांड के शिकार सभी मृतकों को भावभीनी श्रद्धांजलि एवं पीड़ित परिवारों के प्रति मार्मिक संवेदनाएं।😢💐💐 सबसे बड़ा धर्म मानवता है और सबसे बड़ी जाति मानवीयता।👍💐💐

  6. शून्य

    वैसे #जातिवादीयों की छोड़ ही दो #लिब्रान्डू भी उस पहले मृतक #खीमानन्द की हत्या को जायज ठहराते नजर आ रहे हैं और ये न्यूज ब्लॉग भी क्योंकि वो ब्राह्मण था स्वर्ण था जिसकी नृशंस हत्या की गयी एक समूह द्वारा की गयी .. और उसके बाद जो हुवा वो क्या पहली हत्या से अलग था ?? क्या पहली हत्या तड़ी में एक जातीय-समूह ने नहीं की ??? क्या पहली हत्या के बाद हुवी हत्यायें उस पहली हत्या के जनाक्रोश में या प्रतिउत्तर में नहीं हुवी ??? अगर वो 14 हत्याओं में जातिवादी एंगल ढूंढा जा रहा हैं तो उस पहली हत्या में क्या वो मौजूद नहीं था ???

  7. Pankaj

    Aaj bhi aisa hi hota hai uttarakhand mai log cast ke dambh mai kisi ko bhi castism abusive language use krte haI har jagah castism hai uttarakhand mai jamin kharidne bechne se le kar rent room dene pani k dhare use krne mai log jati dekh kr nimantran dete hai chahe wo neighbours hi kyu na ho schools mai bhi wahi hal hai. Mai khud apni aankho se dekha hu

  8. गौरव नेगी

    ये जातिवाद का जहर इतना खतरनाक है की इसका कोई तुरत इलाज भी नहीं
    स्वयं के श्रेष्ठ होने की भावना ने इसे और बढ़ावा दिया है,
    अधिकांश युवा पीढ़ी भी इस श्रेष्ठता से ग्रसित नजर आती है

  9. Rangey Sumer

    कब तक ये जातिय दमन चलता रहेगा??? बहुत बड़ा यक्ष प्रश्न है कि ये जातीय दमन इसलिए हैं कि ये पिछड़े वर्ग हिन्दू समाज के अंग हैं या फिर हिन्दू समाज से अलग है? मेरे ख्याल ये शोषित पिछड़ा वर्ग तथाकथित रुप से तो हिन्दू समाज जुड़ा हुआ है परंतु भावनात्मक और सामाजिक रुप से बिल्कुल अलग है इसिलिए इस समाज का सदेव दमन होता रहा है और होता रहेगा क्योंकि जब तक ये शोषित पिछड़ा वर्ग हिन्दू समाज से भावनात्मक और सामाजिक रूप से नही जुड़ेगा तब तक इनके साथ अत्याचार होता रहेगा ओर तथाकथित उच्च वर्ग इन पिछड़ो को अपने साथ जोड़ेगा नहीं। इसी वजह से इन शोषितो का शोषण होता ही रहेगा। अपने अस्तित्त्व को बचाने के लिए इन शोषित पिछड़े वर्गों को हिन्दू समाज से अलग होकर इनके समस्त रीति रिवाजों को छोड़कर अपनी अलग पहचान बनानी पड़ेगी। तभी जाकर इस वर्ग का अस्तित्त्व बचा रहेगा क्योंकि इन पर अत्यचार को बाकी समाज ज्यादा तवज्जों भी नहीं देता है और ना ही साथ देता है सिवाए चुनाव के दौरान वोट के अतिरिक्त।

  10. नागेन्द्र कुमार

    मुझे तो इसमे कही भी जातिवाद नजर नही आ रहा, जब कुछ लोगो को मन्दिर मे आस्था थी तो उसका सम्मान करना चाहिए था.

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