दिवाली के मौके पर गाँव में बिताए पुराने पलों की याद
छूट जाता है सब-कुछ छूट जाता है सब-कुछ, पर घर छूटता नहीं… इस बात पर मुझे बेपनाह यकीन था. इस यकी... Read more

छूट जाता है सब-कुछ छूट जाता है सब-कुछ, पर घर छूटता नहीं… इस बात पर मुझे बेपनाह यकीन था. इस यकी... Read more
छूट जाता है सब-कुछ छूट जाता है सब-कुछ, पर घर छूटता नहीं… इस बात पर मुझे बेपनाह यकीन था. इस यकी... Read more
सुन्दर चन्द ठाकुर कवि, पत्रकार, सम्पादक और उपन्यासकार सुन्दर चन्द ठाकुर सम्प्रति नवभारत टाइम्स के मु... Read more
उत्तराखंड के आदि निवासी कौन हैं सदियों से बहस का मुद्दा रहा है. सवाल का उत्तर जो भी हो पर इस बात पर... Read more
वैरा जिसे बैर भी कहते हैं, इसका शाब्दिक अर्थ संघर्ष है जो गीत-युद्ध के रूप में गायकों के बीच होता ह... Read more
बचपन में माँ, दादी-नानी से सुने गीतों (लोरियों) की कुछ अस्पष्ट पंक्तियां आज भी दिल की अतल गहराइयों म... Read more
छूट जाता है सब-कुछ छूट जाता है सब-कुछ, पर घर छूटता नहीं… इस बात पर मुझे बेपनाह यकीन था. इस यकी... Read more
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