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4 Comments

  1. Ganesh Joshi

    आलेख पढ़ा। बहुत अच्छा लगा। यादें ताजा हुई। जबरदस्त

  2. हरीश पांडे

    हरीश पांडे
    नैनीताल एक्सप्रेस का लेख दिल को छू गया । हम लोग जिन्होंने अपने बचपन व जवानी के 30 साल लखनऊ में बिताए हैं उनके लिए लखनऊ से जुड़ी हर याद अद्भुत है ।मुरली नगर की रामलीला, रवींद्रालय का रंगमंच ,बोटैनिकल गार्डन में लगने वाली फूलों की नुमाइश ।आज भी दिल पहाड़ से ज्यादा लखनऊ के लिए धड़कता है ।

  3. चन्द्र शेखर लिंगवाल

    उत्तराखंड की सुनहरी याद ताजा करने के लिए आपका धन्यवाद

  4. पंकज सिंह महर

    इसी रेल ने मुझे भी लखनऊ पहुंचाया। जब इम्तहान देने इलाहाबाद या दिल्ली जाते समय यह जंक्शन के प्लेटफार्म नम्बर 6 पर खड़ी होती तो ईजा की याद दिला देती थी यह रेल। इस ट्रेन में हम पिथौरागढ़ वालों के लिए s 7 कोच आरक्षित होता, जिसका रिजर्वेशन पिथौरागढ़ रोडवेज करता था, 6.30 बजे यह टनकपुर से चलती और 8.30 पर पीलीभीत छोड़ देती। इसके तीन डिब्बे रात 12 बजे तक खड़े रहते, जब नैंताल एक्सप्रेस आती तो फिर सफर शुरू होता। बड़ी मोहिली यादें हैं, बेरोजगारी, घी के डब्बे बचाना, भट्ट गहत से लदे हमारे बैग…. यही रेल है, जिसने मुझे दुनिया दिखाई।

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