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3 Comments

  1. Kishot pandry

    Ok

  2. mrigesh

    वाह। रोजी खान को मैंने भी अक्सर रानीखेत में लिखते देखा। दिलचस्प और दूसरे के लिए बड़े फिक्रमंद।
    शरदोत्सव मेले में अंधेर नगरी और एक था गधा के फ्यूज़न से छात्रों और शहर के नामचीन लोगों की संगत से करीब एक
    महीने की रिहर्सल के बाद नाटक हुआ था।पंडित की भूमिका में तब वकालत कर रहे अजय भट्ट थे तो सूत्रधार फौजी कैप्टन दास। वर्मा प्यारे की दुकान से पान बंधवा आगे गाँधी जी की प्रतिमा वाले चौराहे के नीचे नजर पड़ी तो देखा। चौक से रोजी भाई ने लिख डाला था ,अंधेर नगर का गधा।
    वो भूली दास्ताँ ““““

  3. Harish Upadhyaya

    वास्तव मेँ अल्मोडा बुध्दिजीवियों का नगर रहा है। बहुत ही सुंदर लेख लिखा लेखक ने। पुरानी यादें ताजा हो गईंं। धन्यवाद।

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