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4 Comments

  1. कवीन्द्र तिवारी

    अद्भुत।

  2. हरिहर लाेहुमी

    नि:शब्द हूं आपके सरल व शानदार लेख पर कुछ कहने के लिए। आपने जाे सम्मान जनक मुकाम हासिल किया है वह अापकी मेहनत,लगन , समर्पण,सरलता ,शालीनला ,धैर्य का परिणाम है। गर्व का अनुभव हाेता है कि जिस व्यक्ति काे पिछले 30 साल से जानता हूं इतना कुछ हासिल करने पर भी अभी वैसा ही सरल व शालीन हैं। अभी ताे कई मंजिलें हैं जाे आपकी वाट जाेह रही हैं। गांव जाने में सूनेपन का जाे दर्द आपकाे हुआ वह एक संवेदनशील इंसान, जाे जमीन से जुड़ा हाे, काे हाेना स्वाभाविक है। आज ताे हर गांव की हालत ऐसी ही हाे गई है पर बहुत कम लाेग हाेते हैं जिंन्हें गांव का दर्द सालता हाे।

  3. हरिहर लाेहुमी

    नि:शब्द हूं कि कुछ कह सकू। यह सच है कि आपने जाे सम्मान जनक मुकाम हासिल किया है व अापकी मेहनत,लगन , समर्पण,सरलता ,शालीनला ,धैर्य व परिस्थियाें से डठ कर मुकावला कर अपनी राह खुद तलाशने का ही परिणाम है। गर्व का अनुभव हाेता है कि जिस व्यक्ति काे पिछले 30 साल से जानता हूं, इतना कुछ हासिल करने पर भी अभी वैसे ही सरल व शालीन हैं। अभी ताे कई मंजिलें आपकी वाट जाेह रही हैं। गांव जाने में सूनेपन का जाे दर्द आपकाे हुआ वह एक संवेदनशील इंसान, जाे जमीन से जुड़ा हाे, काे हाेना स्वाभाविक है। आज ताे हर गांव की हालत ऐसी ही हाे गई है पर बहुत कम लाेग हाेते हैं जिन्हें गांव का दर्द सालता हाे।

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