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2 Comments

  1. नीरज तिवारी

    श्री भुवन चन्द्र पन्त जी की लेखनी ने अपने लेखों में पुरानी यादों , भवाली के इतिहास का बेहतरीन रेखाचित्रण खीचा है . उन्हें कोटि -कोटि धन्यवाद …..

  2. Puran Bhakt

    आपने अच्छी यादें है सहेजी हैं साधुवाद ।मेरा बचपन भी भवाली में ही बीता है धारे के बगल में एक पार्क होता था जहां हम फिसल पट्टी खेलते थे तथा वहां पर बाइस्कोप वाले से बाइस्कोप में पिक्चर देखते थे बंसी लाल जी 15 अगस्त के अवसर पर चौराहे पर भाषण दिया करते थे रामदत्त भगत जी भवाली के चेयरमैन हुआ करते थे जहां पर आजकल टीआरसी है वहां पर अस्थाई पिक्चर और भी बना था कुल मिलाकर बचपन में आनंदमय जीवन बिताया रामलीला मैदान में रामलीला होती थी जिस का आनंद लेते थे।

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