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8 Comments

  1. Kamlesh Kandpal

    Hello

  2. Anonymous

    शानदार

  3. शशि

    अनेकानेक शुभकामनाएं, एक ऐसा पोर्टल जो हमारे लोगों के लिए, उनकी बातों और संस्कृति के लिये उपयोगी होगा।
    मेरी काफल टीम,सदस्यों को बधाई,शुभकामनाएं।

  4. Anonymous

    Aisa laga jaisai maa site hue apne bachhe ko koi kahani suna Rahi ho….bahut Sundar mam

  5. Dr S K Joshi

    दादी सच कहती थी।

  6. Madhu Sudan Juyal

    I haven’t seen such types of a whatsapp group.
    Really it is amazing.
    I am feeling very proud of become a member of the same.
    Congratulation.
    Great!

  7. Dheeraj Rawat

    Really very beautifull story

  8. अमरजीत सिंह

    मैं कविता की यह पंक्तियाँ अक्सर अपने बचपन से लेकर आज चौंसठ साल की उम्र होने तक गाया करता हूं. मेरे इन पंक्तियों को अक्सर गुनगुनाते हुये सुनकर मेरे छोटे पुत्र ने भी सीख लिया था .
    इसलिए जब इलाहाबाद में पहली बार एक स्कूल में प्रवेश के दौरान वह इतना प्रसन्न था कि वंहा प्रांगण में उगे एक वृक्ष को हाथ से पकड़ कर उसके चारों तरफ घूमते हुये यही पंक्तियां दोहरा रहा था ; काफल पाकौ मैल नी चाखौ ….
    यह कविता और इससे जुड़ी कथा, मैं कभी नंही विस्मृत कर पाउँगा .💐🌹🙏

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