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4 Comments

  1. Anonymous

    विनोद ने जीवन को क़रीब से देखकर उसको गुना है। विनोद की सोच और चीज़ों को उनका देखने का नज़रिया ही उन्हें औरों से जुदा करता है। सपने, कहानियाँ, दृश्य ये ही तो जीवन है। विनोद ने इनको रच दिया है। मेरी मुलाक़ातें विनोद से चंद ही हैं लेकिन उसमें स्पार्क पहले से ही था।

  2. Anonymous

    विनोद सर वास्तव में पहाड़ की जमीन से जुड़े दिग्गज कलाकारों में से एक है हमें उनसे प्रेरणा मिलती है और पहाड़ के प्रति उनके प्रेम यह कहानी सहज रूप से कह रही है

  3. सुरेन्द्र ग्रोवर

    मुझे विनोद कापड़ी का साक्षात्कार का मौक़ा मिला और तभी पता चला कि वे आदमी कम और इंसान ज़्यादा हैं..

  4. Anonymous

    पता नहीं क्यों बचपन की कहानियां ननिहाल के बिना खत्म क्यों नहीं होती। मेरा सुनहरा बचपन नानी,मामा,मौसी के साथ गुजरा, पता ही नहीं क्यों शहर की ओर मुड़ना हुआ। कभी बाघ आ जाने वाले ठहरे, कभी बिराव, तो कभी-कभी किसी के दरवाज़े पर सांप भी आ जानेवाले हुए। पहाड़ में बचपन शुद्ध हवाओं के झोंको के बीच बहुत साफ होता है और कहीं न कहीं वह साफ मन हर उस पहाड़ी के दिल में बसा होता है जिसका बचपन पहाड़ में गुजरा हो।

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