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2 Comments

  1. Jas

    What a beautiful story….so nice….

  2. अनिल कुमार

    बहुत ही सुंदर वे वेदनशील कथा है मेने भी इस चिड़िया को गाते सुना है
    Its true, पहले जमाने की सास बहुत कठौर होती थी वे अपनी बहुओ को बहुत काम करती थी और मायके के नाम पर तो मानो आग लग जाती थी, मैं भी एक उत्तराखंडी हूँ इस तरह की सच्ची घटनाएं व कथाएं बहुत सुनी है अपनी माँ और दादी की जुबानी मेरी दादी जी की सास भी बहुत कठोर थी लेकिन मेरी दादी बहुत अच्छी थी भगवान उन्हें सदैव फूलो की टोकरी में ही रखे 2020 में हमे छोड़ वैकुंठ को प्रस्थान कर गयी, i missed you दादी दादा जी

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