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One Comment

  1. Kamal Kumar Lakhera

    बेशक ऐसा ही है और हो भी क्यों नहीं, जब जुगाड़ू नौकरशाह और कर्मचारी शहरों में गोह की भांति कुंडली जमाकर बैठ जाते हैं तो जिनको पहाड़ों में पोस्टिंग मिलती है वे रिटायर भी वहीं से होते हैं । दूसरे शहर में नौकरी पर भत्ते अधिक और पहाड़ की दुर्गम सेवा में भत्ते तुलनात्मक रूप से बहुत कम तो फिर कोई पहाड़ क्यूं चढ़े ?

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