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One Comment

  1. - लाल्टू

    आह! 1978 मेें उछल कूद करते हुए मैंने यह वाक की थी। आई आई टी – कानपुर की फिज़िकल सोसायटी की ओर से रानीखेत-नैनीताल-जिम-कॉर्बेट भ्रमण। ठंड थी, पर महीना याद नहीं आ रहा। फरवरी या मार्च रहा होगा। शायद वाई एम सी ए यूथ होस्टल में ठहरे थे। टीम में चीनापीक सबसे पहले मैं ही पहुँचा था, ट्रैक से हटकर पत्थरों पर चढ़ते-कूदते हुए। कुछ दोस्त नाराज़ थे कि मैं ज्यादा उछल रहा था। याद है कि पहली शाम ऑब्ज़रवेटरी गए थे और पहली बार शनि के रिंग्स देखे थे। एक दो धुँधले हो चुके फोटोग्राफ अभी भी कहीं पड़े होंगे।

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