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  1. Pramod

    आप ने सही लिखा है। मैं उस क्षेत्र का निवासी हूँ। इस संदर्भ में कुछ बातें साँझा करना चाहता हूं। बचपन मे गाँव की बुजुर्ग आमा से सुना था- पपदेव के सामने जहाँ राजाओं की न्यायालय (कोर्ट) लगती थी, उस जगह को उचकोट कहते हैं। उचकोट की बनावट इस प्रकार से हैं, कि फरियादी सीधे आता था और राजा के सम्मुख अपनी परेशानी बताता था, बाहर आने जाने का कोई दूसरा कोई रास्ता नही होने के पीछे कारण बताया जाता है कि राजा उस व्यक्ति की फरियाद सुन कर न्याय जरूर दिलाएगा, न्याय दिलाने के अलावा को कोई विकल्प नही था, इसी लिए केवल एक रास्ता बना है, राजा के पास भी न्याय करने के अलावा कोई दूसरा मार्ग नही था, उसे फरियादी को न्याय दिलाना ही होता था। उचकोट की पहाड़ से कुछ नीचे की ओर उस पत्थरो में बनी ओखली (अखोल) भी हैं।
    पपदेव के उत्तर-पश्चिम छोर पर चंडाक की ओर स्थित पहाड़ को उदयपुर कहते हैंचपन में जब हम बुजुर्ग आमा से पूछते थे की उस ओखली का मूसल कहाँ है, तो अम्मा बताती थी की राजा-रानी का घर उदयपुर (चंडाक) के जंगलों में है, वही जंगलों में मिलेगा। अगर तुमने कभी खोज लिया तो उसके साथ खजाना भी होगा। जब कभी उदयपुर (चंडाक) की ओर के जंगल से वर्षा वाले बादल आते थे (अभी जिन्हें हम पश्चिमी विक्षोभ वाली बारिश) तो उसका मतलब होता था बे मौके बरसात, यानी बाहर रखा समान/ खेतो के अनाज आदि जल्दी जल्दी समेटने का समय। धन्यवाद।

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