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2 Comments

  1. navin chandra pant

    Bahut sunder aatmakatha.
    Sadhuvad.

  2. Devendra Mewari

    ज़िंदगी क्या-कुछ दिखाती है, कुंवर जी की आपबीती इसकी मिसाल है। क्या-कुछ नहीं देखा-सहा उन्होंने। यह जान कर बहुत खुशी होती है कि उन्होंने सदा सच को सच और ग़लत को ग़लत कहने का साहस दिखाया।
    घटनाओं के तार कब कहां जुड़ जाते हैं, यह भी आश्चर्यजनक है। संघर्षों में पले-बढ़े वन अधिकारी कुंवर जी ने जिस मुख्य वन संरक्षक आर सी सोनी जी का ज़िक्र किया है, मैंने भी तो 1965-66 में उन्हें ही लखनऊ पत्र भेजा था। 1965 और 1966 में दो बार लोकसेवा आयोग से एसीएफ की परीक्षा पास कर लेने के बाद भी जब मुझे ट्रेनिंग के लिए बुलाने का पत्र नहीं मिला तो मैंने दुखी होकर इन्हीं सोनी साहब को एक लंबा पत्र लिखा था कि मुझ जैसा ग्रामीण बालक जो वनों की गोद में पैदा हुआ, जो वनस्पति विज्ञान का विद्यार्थी है और जिसे वनों से बेइंतिहा प्यार है, उसे परीक्षा में फाइनल पास हो जाने के बावज़ूद अब तक ट्रेनिंग के लिए नहीं बुलाया गया है। उनका उत्तर भी मिला था कि उन्हें मेरी ही तरह के लोग चाहिए और वे इस मामले में पता लगाएंगे। खैर,न जाने क्या हुआ। बुलावे का पत्र आज 50 वर्ष बाद भी नहीं मिला है। और हां, जिन वनाधिकारी खोलिया जी का ज़िक्र हुआ है, वे डीएसबी नैनीताल में मेरे सहपाठी थे। हम कई विद्यार्थियों ने यह परीक्षा पास की थी। जीवन में कुछ और करने के लिए मुझे नियति ने दूसरी राह पर भेज दिया।

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