Related Articles

One Comment

  1. दिनेश कर्नाटक

    हम लोगों के बचपन में ऐसी स्थिति थी। मॉनिटरिंग न होने के कारण, प्राथमिक शिक्षा में शिक्षकों की मनमर्जी चलती थी। अगर किसी को पढ़ने-पढ़ाने में रुचि हुई तो ठीक वरना इसी तरह से शिक्षणेत्तर गतिविधियां चलती रहती थी। व्यंग्य की चासनी में डूबी हुई सुंदर रचना।

Leave a Reply

Your email address will not be published.

2019©Kafal Tree. All rights reserved.
Developed by Kafal Tree Foundation