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2 Comments

  1. उमेश तिवारी 'विश्वास'

    ‘सवाल यह है कि इस हारने-जीतने की दौड़ में किसी दूसरे की क्यों रूचि हो?’ पर जैसा कि इतिहास का स्वभाव है वह हार-जीत को बड़े महत्व के साथ रेखांकित करता है। मज़ा आ गया गुरुजी!

  2. Dr मृगेश पांडे

    अद्भुत. दोनों मेरे गुरू.

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