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2 Comments

  1. कमल लखेड़ा

    बचपन से यौवन की ओर अग्रसर जीवन को सफलतापूर्वक उतार दिया लेखनी में ।

  2. Prashant Nautiyal

    बेरोजगारी, आर्थिक तंगी और सरकारी नौकरी की चाह ये तीन ही मुझे इस सुरचित कृती तक ले आये। जब से 18 का हुआ हूं दुनिया एक पहली सी लगने लगी,अब क्या करें,क्या ना करें,क्यूँ ना करें,वर्तमान को त्याग अनिस्चीत भविष्य की कठिन डगर पर चलें , या इन्ही गहरे गडढों (dark circle of eyes due to वो vCR )
    के साथ सब कुछ समायोजित करते हुये। …….. गुरुवर ये सभी प्रश्न्न है उस किशोर के जो ग्रमीणअंचल से बहुत ख्वाबों के साथ बड़े सहर मे प्रवेश करता तो है जिन्दगी को जीतने के लिये परंतु लडाई उसके दिल और दिमाग तक ही सिमट के रह जाती है। ….. आपके मार्गदर्शन का आकाँक्षी …..prashant Nautiyal

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