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5 Comments

  1. Anonymous

    अबू को नमन

  2. Anonymous

    यादेँ – यूँ ही दिल में जगह बनाएँ रहें
    उनकी जिजीविषा और दायित्वबोध से मिलती रहे प्रेरणा ?

  3. gauri shankar kandpal

    सचमुच बहुत मार्मिक चित्रण किया है उन पलों का जिन्हें आपने बचपन से देखा समझा और बड़े हुए उस “अबू” की पीड़ा को भी आपने सजीव चित्रित कर दिया है उत्तराखंड की हर उस नारी को सम्मान सहित अभिवादन नमन जिसने संघर्ष को अपने सीने से ताउम्र लगा कर रखा है।

    गौरीशंकर कांडपाल, संस्कृतिकर्मी, सीसीआरटी

  4. ganesh.pandey101@gmail.com

    शानदार.. उनकी यादें हमें प्रेरित करेंगी।

  5. राजेन्द्र सिंह मनराल

    आदरणीय जोशी जी , एक अत्यंत ह्रदय स्पर्शी वह मार्मिक विवरण ।

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