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26 Comments

  1. Anonymous

    बहुत सुन्दर लिखा है महोदय आपसे वास्तविक्ता के एक दम पास है आपके विचार। भूतकाल और वर्तमान का विश्लेषण ही भविष्य की राह दिखाता है आज के समय में निडर व स्पष्ट लेखन की ही आव१यकता है बहुत -बहुत बधाईया आपको समाज की सुन्दर अभिव्यक्ति के लिए।

  2. Ganesh Joshi

    दिनेश जी बहुत खूब, संस्मरण को पढ़कर बहुत अच्छा लगा। वर्तमान की स्तिथि पर व्यंग्य भी किया है।

  3. Ganesh Joshi

    दिनेश जी बहुत खूब, संस्मरण को पढ़कर बहुत अच्छा लगा। वर्तमान की स्तिथि पर व्यंग्य भी किया है।

  4. Anonymous

    कर्नाटक जी नमस्कार।आपने सटीक विश्लेषण किया है।मै चौपाल को भी पूरा पढ़ता हूँ। किंतु आज सीधे आप से जुड़कर बहुत निकटता का आभास हुआ।आशा है भविष्य में भी इसी तरह लाभ मिलता रहेगा।

  5. Anonymous

    कर्नाटक जी नमस्कार।आपने सटीक विश्लेषण किया है।मै चौपाल को भी पूरा पढ़ता हूँ। किंतु आज सीधे आप से जुड़कर बहुत निकटता का आभास हुआ।आशा है भविष्य में भी इसी तरह लाभ मिलता रहेगा।

  6. Anonymous

    बहुत अच्छा लिखा आपने।बधाई।

  7. आनंद गुप्ता

    बचपन के दिनों की यादें ताज़ा हो गई।बहुत बढ़िया लिखा आपने।

  8. Anonymous

    प्रिय मित्र आपकी कल्पनाशीलता ओर रचनात्मकता के हम कायल हैं।सामाजिक सरोकारों के प्रति आपकी संवेदनशीलता नवयुग निर्माण के लिए प्रेरणादायीं है।शब्दों में सराहना कर पाना आसान नहीं ।सफर जारी रहे।स्वर्णिम भविष्य की शुभकामनाएं।

  9. Anonymous

    ????प्रिय मित्र आपकी कल्पनाशीलता ओर रचनात्मकता के हम कायल हैं।सामाजिक सरोकारों के प्रति आपकी संवेदनशीलता नवयुग निर्माण के लिए प्रेरणादायीं है।शब्दों में सराहना कर पाना आसान नहीं ।सफर जारी रहे।स्वर्णिम भविष्य की शुभकामनाएं।indralalverma@gmail.com

  10. Anonymous

    ????प्रिय मित्र आपकी कल्पनाशीलता ओर रचनात्मकता के हम कायल हैं।सामाजिक सरोकारों के प्रति आपकी संवेदनशीलता नवयुग निर्माण के लिए प्रेरणादायीं है।शब्दों में सराहना कर पाना आसान नहीं ।सफर जारी रहे।स्वर्णिम भविष्य की शुभकामनाएं।

  11. Anonymous

    धन्यवाद आप सभी मित्रों को…

  12. Anonymous

    बहुत सुन्दर सर। आपकी रचनाओं में अपनापन नजर आता है। यूं ही पढ़ाते रहियेगा। धन्यवाद

  13. Anonymous

    अपनी ही कहानी है लगी। इंटर से ग्रेजुएशन तक फिल्मों के लिए मेरी भी यही दीवानगी थी।

  14. Anonymous

    कल ही मैं सोच रहा था कि उस दौर में फिल्में अनेक तरह की जुबली मनाया करती थी । आज मापदण्ड बदल गए।है । उस दौर के बारे मे सोच कर थोड़ी उदासी सी घिर आती है ।हमारे फिल्मो के हीरो हीरोइन थी ।कही हमारी अपनी हीरोइने भी थी ।जो कभी हमारी तो नही थी लेकिन उनका अपने।आस पास होना कई फूल खिलाता तो था।—कोई लौटा दे मेरे बीते।हुए दिन—।आपका लेख बेहतरीन लगा ।किसी जमाने में ले चला गया ।

  15. Prakash kandpal

    कल ही मैं सोच रहा था कि उस दौर में फिल्में अनेक तरह की जुबली मनाया करती थी । आज मापदण्ड बदल गए।है । उस दौर के बारे मे सोच कर थोड़ी उदासी सी घिर आती है ।हमारे फिल्मो के हीरो हीरोइन थी ।कही हमारी अपनी हीरोइने भी थी ।जो कभी हमारी तो नही थी लेकिन उनका अपने।आस पास होना कई फूल खिलाता तो था।—कोई लौटा दे मेरे बीते।हुए दिन—।आपका लेख बेहतरीन लगा ।किसी जमाने में ले चला गया ।

  16. Prakash kandpal

    Nice

  17. Anonymous

    Nice thought

  18. Anonymous

    Prakash kandpal

  19. Anonymous

    सुन्दर ,आपने बड़ी सुन्दरता से विषय को प्रस्तुत किया है ,स्मृतियां साकार हो उठीं ।

  20. Tribhuwan Singh

    बहुत अच्छा लिखा है

  21. Anonymous

    वाह ! शानदार अभिब्यक्ति।
    पुराने दिनों की याद ताज़ा हो गयी।

  22. Anonymous

    बेहतरीन दिनों का संस्मरण,धारावाहिक नुक्कड़ के दिनों की यादें ताजा हो गईं।

  23. दिनेश कर्नाटक

    उत्साहवर्द्धक टिप्पणी के लिए आपका आभार

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