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2 Comments

  1. नाज़िम अंसारी

    यह आलेख पढ़ कर कोई भी आसानी से समझ सकता है कि यह पूर्वाग्रहों से प्रेरित और अल्मोड़े के प्रति दुर्भावना से ग्रसित होकर लिखा गया है | अल्मोड़ा ऐतिहासिक और सांस्कृतिक नगरी है यहाँ के ऐतिहासिक भवन (पत्थर और लकड़ी की नक्काशी वाले प्राचीन भवन जिनमे से अधिकतर आख़िरी साँसे ले रहे हैं ) नेपाली अथवा बिहारी श्रमिकों की मदद से नहीं बल्कि यहां के स्थानीय श्रमिकों के श्रम और कारीगरी का परिणाम हैं | बिना ऐतिहासिक जानकारी के ऐसे सतही लेख नई पीढ़ी को शायद यह सन्देश देना चाहते हैं कि बाहर से आये श्रमिक यहाँ मेहनत करते हैं और यहाँ के स्थानीय नागरिक कुछ नहीं करते और यह भूल जाते हैं कि इन श्रमिकों रोज़गार अल्मोड़े के लोग ही देते हैं | सऊदी अरब में भारतीय मुसलमान ही नहीं सभी धर्मों के लोग पैसा कमाने के लिए जाते हैं और अच्छा पैसा कमाकर अपने देश में भेजते हैं उनसे नेपाली-बिहारी श्रमिकों की तुलना मूर्खतापूर्ण है |

  2. ओम प्रकाश नदीम

    लेख अच्छा है और उपसंहार तो बहुत ही अच्छा है।

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