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1 Comments

  1. Anshul Kumar Dobhal

    महोदय,
    लेख अत्यंत ही रोचक तथ्यपरक और जानकारी से परिपूर्ण है, इसके लिए साधुवाद।
    लेकिन स्वामी रामतीर्थ का आश्रम मालीद्यूल(मालदेवल) में नहीं था, न ही मालदेवल भिलंगना घाटी में था।
    स्वामी रामतीर्थ का आश्रम, जिसे कोठी कहते थे, सेमलासू में था, जो टिहरी से पास ही, भिलंगना के किनारे स्थित था। वहाँ एक सुंदर कोठी थी, जो आम के बगीचे से घिरी थी। डूबने से पहले अंतिम बार मैं उसे देखने गया था, जब उसके खिड़की दरवाजे आदि कीमती सामान आदि निकाल लिया गया था। लेकिन अफसोस, तब मेरे पास कैमरा न था !

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