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2 Comments

  1. Akshaya Sharma

    जानकारी के लिए धन्यवाद।

  2. Anshul Kumar Dobhal

    हटवाल जी 🙏🏻
    आप जैसे प्रबुद्ध लेखक के लेख में इस तरह की सूचना का प्रसारण सही नहीं है।
    लेख में असत्य को पहली सूचना बना दिया, और सत्य को दूसरी, कुछ लोग पूरा लेख नहीं पढ़ते, वो पहले वाली थ्योरी को सत्य मान लेंगे। काफल ट्री को प्रबुद्ध लोग पढ़ते हैं। वास्तव श्रीराम के अयोध्या लौटने वाली बात 11 दिन बाद पता चलने वाली बात हास्यास्पद और अतार्किक है।
    इस पोस्ट का मैंने पहले भी जमकर विरोध किया है,
    फेसबुक, व्हाट्सऐप और अखबार के संपादक को पत्र लिखकर भी।
    दरअसल, जो भी भ्रामक सूचना होती है, उसे यदि हम प्रसारित करते हैं, तो लोग उसे सच मान लेते हैं।
    तार्किक दृष्टि से सोचिए,
    श्रीराम के अयोध्या लौटने की खबर क्या पहाड़ियों को 500 साल पहले मिली ?
    क्योंकि इगास तो 500 साल से ही मनाई जा रही है, और भगवान राम का काल तो हजारों साल पहले का है ?
    जिस युग में पुष्पक विमान जैसी चीज थी, आकाशवाणी होती थी, दिव्यदृष्टि, योगदृष्टि, तपबल आदि से सब पता लग जाता था, उस युग में हम अनजान थे ?
    आपको पता ही है कि हम में से अधिसंख्य लोग 1000 साल के वक्फे में ही उत्तराखंड में बसे, तो दीवाली का हमको ज्ञान नहीं था ?
    ढोल सागर की विद्या जानने वाले पहाड़ी, जो मिनटों में ढोल के माध्यम से ध्वनि की चाल से सूचनाओं का प्रसारण कर देते थे, उनको प्रभु श्रीराम का पता नहीं लगा ?
    देवभूमि के लोग, जहाँ देवता निवास करते थे, जहाँ आज भी देवता ‘बाक’ बोलते हैं, भूत-भविष्य सब बता देते हैं, उनको ये बात पता नहीं चली ?
    और उत्तरकाशी, जौनपुर, जौनसार, प्रतापनगर, इनको ये बात एक महीने बाद पता चली ?(रिख बग्वाल)
    हनुमान जी यहीं से रातोंरात संजीवनी ले गए थे, विमान से भी तेज विद्या के उस युग में हमें अनजान बताना, ये बचकाना है।
    ये सूचना, खुद किसी अज्ञानी व्यक्ति ने बनाई है, जैसे, किसी व्यक्ति को खुद इतिहास न पता हो, और उससे कोई कुछ पूछे, तो वो अपनी अज्ञानता छुपाने के लिए कोई कहानी गढ़ के सुना लेता है, ठीक वैसे ही ये कहानी किसी ने गढ़ी है।
    इसलिए, ऐसी सूचनाएँ प्रसारित करने की बजाय जिसने सुनाई, या भेजी है, उसका खंडन करना चाहिए, अन्यथा लोक में यही स्थापित सत्य बन जाता है।
    इगास का एक मात्र कारण माधोसिंह भंडारी है, और बूढ़ी बग्वाल या रिख बग्वाल का रिखोला लोदी।

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