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One Comment

  1. देवेन मेवाड़ी

    कभी ‘नैनीताल समाचार’ में इन यात्रा संस्मरणों को बड़े मन से पढ़ा करता था। वे दिन याद हो आए। यों भी, विजय मोहन खाती तो हमारे नैनीताल के दिनों के साथी ही हुए। ये संस्मरण पढ़ कर मन में हसरत जागती थी कि काश कभी मैं भी ऐसी यात्रा कर सकता! लेकिन, कई बार जीवन यात्रा ही इतनी कठिन होती है कि दूसरी राह पकड़ नहीं पाते। काफलट्री पर ये शानदार संस्मरण पढ़ कर इन साथियों के साथ दुनिया की सैर कर ले रहा हूं। बहुत रोचक हैं ये।

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