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One Comment

  1. मनीष

    हर जगह वैज्ञानिकता नहीं देखी जाती। ऐसे ही नजरिये से देखने लगेंगे तो फिर कोई भी त्यौहार मनाना अर्थहीन लगेगा आपको देश तो कभी का आज़ाद हो गया फिर भी कुछ तो होगा ही कि इस दिन को सभी धूमधाम से मनाते हैं।
    अर्थहीन तो आपका पूरा लेख हो गया आखरी की बेतुकी की लाइन की वजह से।

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