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4 Comments

  1. कवीन्द्र तिवारी

    ये 1984 या 85 की बात होगी जब में नैनीताल में पढ़ता था केन्फील्ड होस्टल में रहते हुए तल्लीताल के रेस्टुरेंट नयना में रात का खाना खाया और हड़बड़ी में पर्स वहीं छूट गया,रात को होस्टल में पहुंच कर पर्स का ध्यान आया,अब बड़ी चिंता कि क्या होगा उसमे पैसे और अन्य कागज थे,सुबह रेस्टोरेंट पहुंचकर परिचय देते हुए पूछा मालिक ने संतुष्ट होने पर पर्स लौट दिया,ये घटना अभी भी जहन में रहती है।

  2. navin chandra pant

    बहुत सुंदर चंद्रशेखर जी धन्यवाद

  3. गणेश जोशी

    नई पीढ़ी को जागरूक करने के लिए इस तरह की पहल जरूरी है। शानदार लेख सर। उम्मीद है आगे भी इसी तरह के मोटिवेशनल लेख पढ़ने को मिलते रहेंगे।

  4. हेमंत बग़ड़वाल

    बहुत बढ़िया संस्मरण
    ईमानदारी से ही ये दुनिया कायम है सरदार चड्डा जी जैसे लोगो का आज नाम आ रहा है तो ये उनकी ईमानदारी का ही प्रतिफल है

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