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2 Comments

  1. हरिहर लाेहुमी

    शिकारी का पछेटिया बन कर भी मन अन्दर से शिकार की सलामती की फिक्र करता रहे यह स्थिति वेहद दिलचस्प है। यह सुखद है कि शिकार की सलामती का पलड़ा भारी रहा, एक जीवन बच गया

  2. Rakshit Kothari

    Very nice stories ठैरी।

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