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3 Comments

  1. suraj p. singh

    शानदार साक्षात्कार!

  2. विकास नैनवाल

    आखिर में पढ़कर दुःख हुआ। काफी कुछ रह गया। विनम्र श्रद्धांजलि।

  3. सुशील कुमार जोशी

    इस साक्षात्कार को पूरा होना चाहिये था। डा0 शमशेर बिष्ट जैसी शख्सियत हमारे आस पास आज अंगुलियों में गिनी जा सकती हैं। वे मेरे लिये हमेशा एक प्रेरणा श्रोत रहे। उनके चले जाने से एक निर्वात तो पैदा हो ही चुका है। उनकी कमी खलेगी।

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