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2 Comments

  1. indrajeet Gorakhpuri

    बहुत ही अच्छा लेख लिखा है। महिलाओं के उस दर्द या भावना को जुबान दी जिसे वे बयां नहीं कर पाती थीं। एक बात कहना चाहूंगा कि अब दौर बदलता जा रहा है। अब महिलाएं शिक्षित हो रही हैं और उसने पुरुष थोड़ा समझदार। अब दोनों मिलकर फैमिली प्लानिंग कर रहे हैं। हालांकि ग्रामीण क्षेत्रों में अब भी महिलाएं स्वतंत्र नहीं हैं।

  2. कमल लखेड़ा

    इन परिस्थितियों को को औरत कई युगों से ढों रही है । कितने विचार और इच्छाएं मारकर एक औरत जीवन जिया जाता है ?

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