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  1. Anonymous

    बटरोही जी की नौवीं किस्त में बंग्ला के राजभाषा न बनने के विषय में उल्लेख किया गया है। मैंने निराला जी का लेख कहीं पढ़ा था जिसमें कहा गया है कि,” बंग्ला के लिए बहुत प्रयत्न किये गये थे।” इस सम्बंध में निराला जी नेहरु जी से मिले भी थे। निराला जी बंग्ला भी अच्छी तरह जानते थे। शायद उनकी किताब “परिमल” में इसका उल्लेख है। हिन्दी किसी क्षेत्र विशेष की भाषा नहीं होते हुए भी, उसे क्षेत्र विशेष की भाषा मानकर राजनीति की जाती है।
    महेश रौतेला,
    mahesh.s.rautela@gmail.com

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