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  1. देवकी नंदन बड़ोला

    बादलों में भवाली – लेखक ने लिखा है भवाली में हाईस्कूल को 63-64 में मान्यता मिली ! यह जानकारी शायद अतीत के गर्व में चली गई हो, तब भवाली केवल जूनियर हाई स्कूल था ! भवाली की प्रबुद्ध लोगों ने फैसला किया कि यहाँ हाई स्कूल होना चाहिए ! इसलिए प्राइवेट हाई स्कूल खोला गया, इसमें में भी एक छात्र था ! 1954 में पहला बैच प्राइवेट छात्रों के रूप में हाई स्कूल परीक्षा देने हेतु नैनीताल केंद्र में गया ! तब भवाली में बिजली नहीं होती थी ! हमें फ्लैट में स्थित हॉल में ठहराया गया ! पहली रात्रि हम सो नहीं पाए क्योंकि बिजली की रोशनी चारों ओर उजाला कर रही थी ! इस पहले बैच में केवल 4 छात्र पास हुए थे ! रघुबर दत्त. दौलत सिंह, भुवन चन्द्र और मैं ! स्कूल के पास एक पगडंडी थी उसमें सिसूणा का झाड़ के पौधे थे ! अंग्रेजी के क्लास में मार के डर से हाथों में सिसूणा लगाकर बहादुरी से मार झेलते थे ! पर हेड मास्टर साहब को यह सब पता चला तो उन्होंने सिसूणा का झाड़ हमारे ही हाथों से हटवा दिया था ! बचपन के दिनों की मस्ती याद करके बड़ा आनंद आता है ! आज मैं 83 साल का हूँ ! मुझे गर्व हैं मेरा बचपन भवाली में बीता !!

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