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13 Comments

  1. Anonymous

    नमस्कार सर🙏🙏 बहुत ही सुंदर कम शब्दों में बहुत कुछ कह गए आप ।बिचरों का प्रभाव बहुत तेज गति से चलने पर भी अपनी लाइन से भटके नही। शब्दों में बहुत कंट्रोल रखते हो।आपके बात कहने का अंदाज बहुत निराला है। ये बात रखने का अंदाज आपको एक दिन जानेमाने साहित्यकारों से भी ऊप्पर ले जाएगा ऐसा मेरा मानना है।👏👏👏👏👏👏👍👍👍👍

  2. आनंद गुप्ता

    बहुत ही जरूरी टिप्पणी है।हमारे समय का सच।

  3. Anonymous

    दिनेश जी बहुत बढ़िया व्यंग्य। एकदम सामयिक। देश की दशा भाईसाहब जैसी हो गयी। शुभकामनाएं। जारी रखें

  4. Anonymous

    लेखनी का जादू है सर आपके साहित्य ज्ञान कमन्डल से सभी शब्द सटीक और फ्रभुत्वपूर्ण निकलते है
    निशचित रुप से लेख समय के बदलते स्वरूप पर कोई ठोस बात कहने में समर्थ है जो महत्वपूर्ण है

  5. बीना

    लेखनी का जादू है सर आपके साहित्य ज्ञान कमन्डल से सभी शब्द सटीक और फ्रभुत्वपूर्ण निकलते है
    निशचित रुप से लेख समय के बदलते स्वरूप पर कोई ठोस बात कहने में समर्थ है जो महत्वपूर्ण है

  6. Prakash k

    लेख प्रासंगिक है ।आजकल सभी इस बारे मे बाते करते कही न कही मिल ही जाते है ।आजसे दो तीन दशक पहले इसतरह के काम करने वालेको कुछअच्छी नजरो से नहीदेखा जाता था लेकिन अब तो सामाजिक मान्यता मिल जैसी गयी है।यदि हम इस corruption को अपना अच्छा व दूसरे का गलत की नजर से देखेंगे तो फिर क्या?मेरे ख्याल सेयदि हमारी पीड़ा सरकार से ज्यादा मूल मसले पर होगी तो अधिक निरपेक्ष लगेगा । —-वो सुबह कभी तो आएगी सुबह का इंतजार कर—-।

  7. Anonymous

    अच्छी रचना के लिए बधाई..

  8. सविता प्रथमेश

    अच्छी रचना के लिए बधाई..

  9. Shefali pande

    Very nice article.. .good satire…

  10. मुलख सिंह

    बहुत सटीक और कलात्मक टिप्पणी ।। शब्दों में बहुत दम है जी आपके ।।

  11. दिनेश कर्नाटक

    आप की उत्साहवर्धक टिप्पणियों के लिए हृदय से आभार !

  12. Anonymous

    सचमुच गम्भीर से गंभीर बातों को बड़ी सरलता से कह देना आपकी विशेषता है।

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